साईं के मंगल को कर दिया अमंगल- एक आवासीय परिसर बना कूटरचित दस्तावेजों का दंगल- भाग 1

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🔸 सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार बना एक बार फ़िर भू माफियाओं का हथियार

🔸झूठ की बुनियाद पर तामीर हो रहा है वृहद आवासीय परिसर

🔸रायगढ़ नगर निगम की सरहद पर हुआ भयंकर भूमि फर्जीवाड़ा

🔸आदिवासी, कोटवारी जमीन को भी लील गए भू माफिया

🔸शासकीय जमीन, नाला को पाट कर बना दिया रास्ता, और करा ली कालोनी स्वीकृत

रायगढ़।शासन चाहे लाख सुधार कर ले,नये नियम कानून बना ले लेकिन राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की वजह से जमीनों के नित नए फर्जीवाड़े सामने आते ही रहते हैं।गंभीर से गंभीर मामलों में भी दोषियों के बच निकलने के इतिहास के चलते भी फर्जीवाड़ा करने वालों के हौसले बुलंद रहते हैं।चांदी के जूते के सामने सिस्टम का सर झुकाना परम्परा बन गई है।पटवारी,आर आई चंद रुपयों के लालच में ऐसे ऐसे फर्जीवाड़े को अंजाम देने से गुरेज नहीं करते जिससे न केवल शासन को करोडों रुपये की हानि होती है बल्कि कई प्रभावितों के मौलिक अधिकारों का भी हनन होता है।केवल बात पटवारी, आर आई तक ही सीमित रहती तो माना जा सकता था कि छोटे पद की गरिमा चंद रुपयों के लालच में नीलाम की जा सकती है लेकिन उच्चाधिकारियों की शह और भागीदारी ने कर्तव्यनिष्ठा और शपथ को मानों सरेआम नंगा करने की ठान ही ली है।

एक आवासीय परिसर में भूमि फर्जीवाड़े को अंजाम तक पहुंचाने वाले सिस्टम की ऐसी ही काली करतूत को तथ्यों और सबूतों के साथ

उजागर करती ख़बर

जल्द ही विस्तार से पढ़ें रायगढ़ दर्पण के अगले अंक में ……

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